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देवी अहिल्याबाई होल्कर : भारत के पुनर्निर्माण की जननी जिन्हें लोग देवी की तरह पूजते हैं

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ब्रिटिश सरकार में सेंट्रल इंडिया के पॉलिटिकल एजेंट रहे सर जॉन मेल्कम ने एक बार देवी अहिल्याबाई होलकर के बारे में कहा था कि , " उनका रहन-सहन अत्यन्त सरल, सादा और चरित्र अत्यन्त महान था। वैधव्य का सच्चा हिन्दू आदर्श जैसा कि उन्होंने निभाया  था, वैसा बहुत कम विधवाएं कर सकी हैं। एक महारानी के लिए तो यह और भी सराहनीय है। वे सदैव श्वेत साड़ी पहनती थीं। रंगीन बेलबूटेदार कपड़ा वे कभी नहीं पहनती थीं। अहिल्याबाई का जीवन चरित्र विमल और शासन अत्यंत प्रशंसनीय था। उनका जीवन इस बात को स्पष्ट करता है कि भगवान के प्रति भक्ति रखकर कर्तव्य परायण होने से मनुष्य को कितना व्यवहारिक लाभ होता है।"  मेल्कम के शब्द एकदम सच ही हैं क्योंकि जिस क्षेत्र में शासिका के रूप में अहिल्याबाई होलकर ने शासन किया था वहां देवी के नाम से संबोधित किया जाता है। एमपी के मालवा में केवल देवी नाम से ही नहीं जाना जाता बल्कि देवी के रूप में पूजा करते हैं। इंदौर के राजबाड़ा के सामने बने पार्क में देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा की रोज विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पूजा का गवाह तो मैं भी हूं। आरती की जाती है, फूलों...