बटेश्वर मंदिर समूह : भारत का ऐसा मंदिर समूह जिसके पुनर्निर्माण में डाकू ने दिया योगदान
बटेश्वर मंदिर समूह : भारत का ऐसा मंदिर समूह जिसके पुनर्निर्माण में डाकू ने दिया योगदान
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| बटेश्वर मंदिर समूह, मुरैना |
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| बटेश्वर में मंदिरों का विहंगम दृश्य |
बटेश्वर मंदिर समूह चंबल क्षेत्र में स्थित कला का अद्भुत नमूना हैं। बलुआ पत्थर से बने इन मंदिरों का निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजाओं ने करवाया था। इन मंदिरों का निर्माण 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ था। विशाल क्षेत्र में स्थित ये मंदिर भगवान विष्णु, शिव और देवी को समर्पित हैं। यहां मंदिर में आकार और आकृति में विभिन्नता साफ-साफ देखी जा सकती है। छोटे-छोटे मंदिरों में आज भी कला जीवित है। किसी मंदिर में शिखर है, तो किसी मंदिर की छत सपाट हैलेकिन एक बात जो सभी मंदिरों में समान रूप से दिखाई देती है वो है चबूतरा। मंदिरों को चबूतरे पर बनाया गया है।
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| चबूतरे पर बने मंदिरों का समूह |
मंदिर के दरवाजों से लेकर शिखर तक कलात्मकता देखने को मिलती है। मंदिरों के दरवाजों की चौखट पर बारीक कारीगरी देखने को मिलती है। चौखट और दरवाजे के आसपास देवी-देवताओं, यक्ष-यक्षिणी, गंधर्व देखने को मिलते हैं। इसके अलावा रति करते अवस्था में कृतियां भी देखने को मिलती हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों पर कलात्मकता दिखाई देती है। जहां पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों के अलावा देवी-देवता भी मिलते है। मंदिर के शिखर पर अलग-अलग तरह की कारीगरी देखने को मिलती है जो इसे अनोखा बनाती है। मंदिरों के आमलक भी अलग-अलग नजर आते हैं।
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| कलात्मक मंदिरों की पंक्ति |
इन मंदिरों का पुनर्निर्माण(Reconstruction) किया गया है। अलेक्जेंडर कनिंघम ने साल 1882 में इन मंदिरों की खोज की थी। तब मंदिर जीर्ण-शीर्ण (Dilapidated) अवस्था में थे। तब अलेक्जेंडर कनिंघम ने 100 मंदिरों का पता लगाया था। कहा जाता है कि मंदिर भूकंप आने की वजह से टूट गए थे या फिर आक्रमणकारियों ने इस जगह को तबाह कर दिया था। अलेक्जेंडर कनिंघम ने मंदिरों के बारे में अपनी डायरी में लिखा था कि “Very fine old temples”। आज जो मंदिर है उन्हें वर्तमान स्वरूप देने का श्रेय केके मोहम्मद को जाता है।
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| मंदिर पर उकेरी गई सुंदर कारीगरी |
मंदिरों के पुनर्निर्माण(Reconstruction) के पीछे एक कहानी है। बटेश्वर जिसे स्थानीय लोग बटेसर भी कहते हैं। बटेश्वर बीहड़ के पास स्थित है। यहां एक समय निर्भय सिंह गुर्जर का आतंक था और उसका ठिकाना ये बटेसर के खंडहर थे। एक बार मंदिरों के खंडहरों पर बैठकर निर्भय सिंह गुर्जर बीड़ी पी रहा था। उस समय आर्कियोलॉजिस्ट केके मोहम्मद आ गए। केके मोहम्मद ने निर्भय गुर्जर पर चिल्लाते हुए कहा कि तुम्हें शर्म नहीं आती तुम मंदिर में बैठकर बीड़ी पी रहे हो। केके मोहम्मद को ये बात नहीं मालूम थी कि वो डाकू निर्भय सिंह गुर्जर है।
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| बटेश्वर के कलात्मक मंदिर |
केके मोहम्मद के साथियों ने बताया कि ये डाकू निर्भय गुर्जर है। तब केके मोहम्मद ने निर्भय गुर्जर को समझाया कि उन्हें इन मंदिरों की मरम्मत करना है। उसे ये भी बताया कि ये मंदिर तुम्हारे पूर्वजों ने ही बनवाए थे। निर्भय गुर्जर ने केके मोहम्मद का साथ दिया। केके मोहम्मद की मेहनत और अथक प्रयास से आज बटेश्वर के मंदिर फिर से जीवित हो उठे हैं। आज बटेश्वर में 200 मंदिर अपनी कहानी बयां कर रहे हैं। सैनिकों की भांति खड़े मंदिर अपने सुरक्षा खुद ही कर रहे हैं।
⛅ कब जाएं (Best time to visit)
बटेश्वर या बटेसर घूमने के लिए सबसे अच्छा मौसम ठंड है। आप यहां अक्टूबर से मार्च तक घूमने जा सकते हैं।
🗺 नजदीकी टूरिस्ट प्वॉइंट (Nearest tourist attraction point)
बटेश्वर से नजदीकी कई सारे टूरिस्ट प्वॉइंट हैं जिनमें पढ़ावली, मिटावली का चौसठ योगिनी मंदिर, दतिया, ग्वालियर, अटेर किला, नूराबाद, घड़ियाल सेंक्चुरी।
कैसे पहुंचें (How to reach)
🛫 एयर (Air) – बटेश्वर से नजदीकी एयरपोर्ट विजयाराजे सिंधिया हवाईअड्डा है जो ग्वालियर में स्थित है। यहां से दिल्ली और दूसरे शहरों के लिए फ्लाइट आसानी से मिल जाएगी।
🚈 रेल (Rail) – बटेश्वर से नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन ग्वालियर है। यहां से देश के विभिन्न शहरों के लिए ट्रेन उपलब्ध है।
🚌 सड़क (Road) – बटेश्वर से नजदीकी ग्वालियर इंटरस्टेट बस स्टेशन है जहां से देश के अलग-अलग शहरों के लिए बस उपलब्ध है।
आपके पास अपना कोई साधन है तो बेहतर होगा। इसके दो कारण हैं, पहला आपके समय की बचत होगी। दूसरा आप एक साथ तीन शानदार जगहों को देखने जा सकते हैं जिनमें बटेश्वर, पढ़ावली और मिटावली शामिल हैं। आप ग्वालियर से टैक्सी किराये पर लेकर सफर मजा ले सकते हैं।
PADHAWALI : THE HIDDEN TREASURE
📃BY_vinaykushwaha






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