पढ़ावली : चंबल का अनमोल और छुपा हुआ खजाना


 
पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना,
पढ़ावली मंदिर

चंबल और बीहड़ का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले जो तस्वीर सामने आती है वो डकैतों की है। एक समय था जब चंबल नदी के आसपास के क्षेत्र और बीहड़ में डाकुओं का बोलबाला था। लोग डाकुओं के आतंक से परेशान थे लेकिन आज ये इलाका सांस ले रहा है। खुली हवा का आनंद ले रहा है। जैसे पहले लिया करता था। चंबल नदी के आसपास के इलाके में 6वीं से 13वीं शताब्दी (Century) के कई ऐतिहासिक स्थल (Historical Site) देखने को मिलते हैं। इन्हीं ऐतिहासिक स्थल में एक है पढ़ावली(Padhavali)।


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
पढ़ावली गढ़ी का सिंह द्वार

पढ़ावली, मुरैना से  29 किमी और ग्वालियर से 35 किमी दूर स्थित है। पढ़ावली अपने मंदिर और गढ़ी के लिए जाना जाता है।   पढ़ावली गांव में एक गढ़ी (Fortress) है जिसे गढ़ी पढ़ावली कहते हैं। यहां एक गढ़ी के अंदर एक मंदिर है जो आकर्षण का केंद्र है। गढ़ी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गईं हैं। सीढ़ियों की शुरुआत मेें ही दोनों तरफ शेर और शेरनी की मूर्ति लगी हुई जो मानो इस तरह लग रहा है कि वे इस गढ़ी की रक्षा किसी सैनिक की तरह कर रहे हैं। आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि शेर मुख्य द्वार की रक्षा करता है लेकिन यहां शेर और शेरनी दोनों  हैं।




पढ़ावली के बारे में यूट्यूब पर देखें


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
मंदिर की कलात्मक दीवार

जैसे ही सीढ़ियां पार करते हैं सामने आता है मंदिर का मुखमंडप। इस गढ़ी में अब ये मुखमंडप ही बचा है। ऐसा कहा जाता है कि पहले यहां एक विशाल मंदिर था जो भगवान शिव को समर्पित था। मुखमंडप में नंदी की प्रतिमा स्थापित थी। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण (Construction) कच्छवाहा वंश के राजाओं ने 10वीं शताब्दी में करवाया था। मुखमंडप बेहद ही शानदार है। इसे देखकर लगता है कि मंदिर कितना विशाल और कलात्मक रहा होगा। बलुआ पत्थर से बना मुखमंडप बेहद कलात्मक है जिस पर बारीक कारीगरी की गई है। खंभों से लेकर छत तक कारीगरी की अद्भुत कला दिखाई देती है।


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
मंदिर की छत पर कलात्मक कमल की आकृति

इस मुखमंडप में दो द्वार हैं जो उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर हैं। सोलह खंभों पर खड़ा ये मुखमंडप एक चबूतरे पर बनाया गया है। खंभों पर की गई बारीक कारीगरी इसे और शानदार बना देती है। इन खंभों पर फूल, पत्ती, जंजीर से लटकी घंटी, उल्टा कमल, योगिनी और भोग-विलास की मुद्रा (Sex Posture) को उकेरा गया है। खंभों पर अलग-अलग देवी-देवताओं के अलावा यक्ष-यक्षिणी, गंधर्व आदि को उकेरा गया है। मुखमंडप की अंदरूनी छत पर जो कारीगरी की गई है वो विस्मय में डालने वाली है। कारीगरी को देखकर लगता है 3डी प्रिंटिंग की गई हो।


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
मंदिर की दीवार पर देवी दुर्गा समेत अन्य देवी-देवता 

कभी-कभी इस तरह की कारीगरी कैसे संभव है? ये सोच का विषय बन जाता है। हजारों साल पहले इतनी शानदार कलाकृति बनाना एक सुखद अनुभव देता है। मंदिर के गवाक्षों पर विभिन्न धार्मिक कहानियों को बड़ी ही खूबसूरती से उकेरा गया है। स्तम्भों पर मानवीय एवं जानवर स्वरूप आकृतियों के अतिरिक्त घटना पल्लव को बनाया गया। शिव परिवार, सूर्य, शिव विवाह, शिव भक्तों की कतारें, शिवलिंग की पूजा, विष्णु के दसावतार, कृष्णलीला, चामुंडा, विद्याधर, गंधर्व, नतृकियां, संगीतकार, गायक, मैथुनरत युगल सही एवं संतुलित आकार में उकेरे गये हैं।


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
मंदिर के कलात्मक खंभे

मंदिर की अंदरूनी छत में सबसे ऊपर तीन फूल की आकृति बनी हुई हैं। इन फूलों में एक पूरा खिला हुआ है और दो आधे खिले हुए फूल हैं। ये सब देखकर मन करता है इन्हें बस देखते रहें। मंदिर के अवशेषों में प्राप्त एक विशाल नंदी की प्रतिमा से ऐसा प्रतीत होता है कि ऊंचे अधिष्ठान पर निर्मित यह एक शिव मंदिर था। मंदिर के अंतः भाग में दीवारों पर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उत्कीर्ण है जिनमें – ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, गणेश, काली एवं विष्णु के अवतारों का अंकन प्रमुख है। इनके अतिरिक्त दीवारों पर भागवत, रामायण एवं पुराणों से संबंधित प्रतिमाओं को उकेरा गया है जो उस काल की कला एवं संस्कृति को प्रतिबिम्बित करती है।


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
गढ़ी पढ़ावली 

इस मुखमंडप के अलावा यहां बाद एक गढ़ी बनाई गई। इस गढ़ी का निर्माण गोहद के जाट राणाओं ने 19वीं शताब्दी में करवाया था। बाहर से पत्थर की ऊंची-ऊंची दीवार से बनी इस गढ़ी में कमरों के अलावा एक बावड़ी और एक कुआं भी है। इसके अलावा इस गढ़ी में बुर्ज को भी बनाया गया है जो सैनिकों के पहरा देने के लिए बनाया गया था। गढ़ी के अंदरूनी भाग में ईंट का इस्तेमाल किया गया है। दरवाजे और खिड़कियां मेहराब बनाई गई है। जो इस्लामिक स्थापत्य कला का उदाहरण है।


पढ़ावली, गढ़ी पढ़ावली, पढ़ावली मुरैना
पत्थरों से बनी मध्यकालीन गढ़ी

पढ़ावली, बटेश्वर और मितावली के बीच स्थित है। बटेश्वर और मितावली दोनों बेहद शानदार जगह हैं जो मुरैना जिले की शान हैं। आप एक बार जरूर पढ़ावली जाएं


🌦 पढ़ावली कब जाएं
(Best Time To Visit)
पढ़ावली घूमने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। ठंड के मौसम में आप आसानी से घूम सकते हैं और गढ़ी पढ़ावली को निहार सकते हैं।


पढ़ावली कैसे पहुंचे

(How To Reach)

✈️ एयरपोर्ट :- पढ़ावली से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। इस एयरपोर्ट से आपको दिल्ली और दूसरे शहरों के लिए फ्लाइट  आसानी से मिल जाएगी।

🚝 रेलवे स्टेशन :- पढ़ावली से नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मुरैना है। इसके अलावा पढ़ावली से 35 किमी दूर ग्वालियर जंक्शन है। यहां से देश के बड़े शहरों के लिए ट्रेन उपलब्ध है।

🚌 बस स्टैंड :- पढ़ावली से नजदीकी बड़ा बस स्टैंड मुरैना है।


🗺️ पढ़ावली से नजदीकी टूरिस्ट प्वाइंट
(Nearest Tourist Attraction Point)

पढ़ावली से सबसे नजदीक दो टूरिस्ट प्लेस (Tourist Place) हैं। इन जगहों में मितावली और बटेश्वर शामिल हैं। इसके अलावा ग्वालियर, दतिया, झांसी, नूराबाद, शनिश्चरा, चंबल अभ्यारण हैं।

BY_vinaykushwaha


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जबलपुर : मार्बल रॉक का शहर जहां नर्मदा नदी के किनारे देखने को मिलते हैं अलग-अलग रंगों के मार्बल

शहडार जंगल : इतना घना जंगल जहां सूरज की रोशनी भी जमीन तक नहीं पहुंचती, कटनी का ये जंगल आपको कर देगा दंग!!!

बहोरीबंद : कटनी के नजदीक स्थित ये शहर जो 2253 साल पुराने सम्राट अशोक के अभिलेख और 1600 साल पुराने कंकाली देवी मंदिर के लिए फेमस है