कमलापति महल - भोपाल की एकमात्र हिंदू रानी कमलापति, जिनका महल है इंजीनियरिंग का शानदार अजूबा

रानी कमलापति महल 

भोपाल के कमला पार्क के एक तरफ बड़ा तालाब  है जिसका ओर-छोर दिखाई नहीं देता है तो वहीं दूसरी ओर छोटा तालाब जिसे गूगल मैप में दिखने पर मानो ऐसा लगता है जैसे कोई शेर हो। कई लोग इस पार्क के सामने से गुजर जाते हैं और कई लोग इस पार्क से गुजर जाते हैं लेकिन इस पार्क के नाम पर कभी ध्यान नहीं देते हैं। कमला पार्क, नाम तो साधारण है लेकिन इस नाम के पीछे की कहानी असाधारण है। पार्क से छोटे तालाब की ओर निहारने पर सिंहासन पर शान से सिर पर पल्लू डाले हुए बैठी एक महिला दिखाई देती हैै । इन्हीं महिला के नाम पर इस पार्क का नाम कमला पार्क रखा गया है। इस महिला का पूरा नाम है कमलापति। कमला पार्क में ही स्थित है कमलापति महल। पार्क में आने वाले लोग अक्सर इस महल की तरफ आते ही नहीं है जो आते भी हैं वे भी बड़ी चलताऊ नजरों से निहारते हैं। महल और ये जगह दोनों इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है। 

रानी कमलापति महल 

लगभग 300 साल पुराना है कलमापति महल 

कमला पार्क में स्थित महल का निर्माण रानी कमलापति ने करवाया था। साल 1722 में निर्मित ये महल देखने में भव्य और सुंदर नहीं है लेकिन इसका महत्व बहुत ज्यादा है। कहा जाता है कि कमलापति के पिता कृपाराम चंदन गोंड चौधरी थे। वे भोपाल के निवासी थे। कमलापति का स्वयंवर रायसेन जिले के गिन्नौरगढ़ के राजा निजामशाह के साथ हुआ। कहा जाता है कि निजामशाह को बाड़ी के शासक ने जहर देकर मार दिया। नवाब शाहजहां बेगम ने ताजुल इकबाल नामक किताब में लिखा है कि गिन्नौरगढ़ के शासक की हत्या के बाद उनकी रानी कमलापति और  बेटा नवल शाह गिन्नौरगढ़ में सुरक्षित हो गए थे। तब रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद जीराह को मदद के लिए बुलाया। दोस्त मोहम्मद अफगानिस्तान का निवासी था जो मध्य भारत मेस्वतंत्र सत्ता के उद्देश्य से आया था। रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद की सहायता से बाड़ी पर कब्जा कर लिया। 


रानी कमलापति का स्टैच्यू

परमार और गोंड काल का अद्भुत संगम 

कमलापति महल की बात करें तो दोमंजिला इस महल  को गोंडकालीन कहा जाता है। ये दोमंजिला महल है जिसका प्रवेश द्वार (Main entrance) पश्चिम दिशा की ओर है। सामने की ओर मेहराबों की पंक्तियां दिखाई देती हैं तो दूसरी मंजिल पर पूर्व दिशा में बाहर की ओर निकले एक छज्जे से छोटे तालाब का मनोहारी दृश्य(View) दिखाई देता है। आजकल यहां सुंदर-सा आर्च ब्रिज दिखाई देता है । इस महल की सबसे अच्छी बात है कि ये दो समय को जोड़ता है। इस महल का आधार (Base) परमार कालीन और महल गोंडकालीन है। इस महल का निर्माण पारंपरिक (Traditional) तरीके से किया गया है जिसमें पत्थर, ईंट और चूने के गारे का प्रयोग किया गया है। चूने के गारे में उड़द की दाल, बेल, मैथीदाना, बेल और सन की रस्सी भी मिलाई गई है। 


रानी कमलापति महल का छोटे तालाब से नजारा


इंजीनियरिंग का शानदार अजूबा 

इस महल की इससे भी अनोखी बात ये है कि इसे ठंडा रखने के लिए इंजीनियरिंग(Engineering) का शानदार उदाहरण पेश किया गया है। महल के ऊपरी दो कमरों  की छत पर आयताकार टंकी(Rectangular Tank) बना हुआ है जिसमें बारिश का पानी इकट्ठा होता था। इस टंकी से छोटी-छोटी निकासियों से पानी कमरों तक पहुंचता था मानों इस तरह लगता था जैसे बारिश हो रही हो। इसी कमरे के फर्श पर एक अष्टकोणीय फव्वारा(Octagonal fountain) लगा हुआ है। इस फव्वारे का जुड़ाव भी छत वाले टैंक से है। तांबे का पाइप (Copper Pipe) से फव्वारे का निर्माण किया गया है। फव्वारे को चलाने के लिए साइफन तकनीक का सहारा लिया गया है। इस महल की बस इतनी ही खूबी नहीं है बल्कि इससे आगे जाकर इस महल तक पानी पहुंचाने के लिए पनचक्की का इस्तेमाल किया जाता था। छोटे तालाब से पानी पनचक्की के सहारे महल तक पहुंचाया जाता था।  इस महल की खूबियां जानकार आप भी वाह-वाह करने से अपने आपको नहीं रोक  पाएंगे।  

छोटे तालाब पर बना आर्च ब्रिज

लगभग 1000 हजार साल पुराने बांध पर बना है महल 

कमलापति महल का आधार (Base) एक पाल का है जो पानी के प्रवाह को रोके हुए है। लगभग एक हजार साल पहले परमार वंश के राजा भोज ने कोलांस नदी का पानी रोककर एकत्र करने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने भोपाल की पहाड़ियों में पाल बनवाये। पाल जो पानी को रोके रखते हैं। एक पाल कमलापति महल के नीचे आज भी मौजूद है जो लगभग हजार साल पुराना है। इस पाल में एक सुरंग(Tunnel) भी है जो बड़े तालाब के अतिरिक्त पानी को छोटे तालाब तक पहुंचाती है। इस सुरंग की लंबाई 148 मीटर , चौड़ाई 1 मीटर और ऊंचाई 2.60 मीटर है। इस का मुहाना पनचक्की के पास है। ये पनचक्की आज भी चालू अवस्था (Operational condition) में है। 


कमलापति महल इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है।  बेमिसाल शब्द शायद थोड़ा फीका-सा लगता है। महल की इमारत भले ही विशाल और भव्य नहीं है लेकिन जिज्ञासुओं के लिए प्रयोगशाला है। इसलिए कहा जाता है कि एमपी अजब है, एमपी गजब है। 

CONTENT BY_vinaykushwaha 

PHOTO BY - ASHWIN JAIN 

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