मैहर : शारदा देवी मंदिर और प्रकृति का बेजोड़ मेल
मैहर भारत के सबसे पवित्र शहरों में से एक है। 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मैहर में सती माता का हार गिरा था। बात कुछ इस तरह है कि जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती माता के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। 51 टुकड़े जिन स्थानों पर गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। मैहर में माता सती का हार गिरा और इसलिए शक्तिपीठ कहलाया।
मैहर का अर्थ होता है माता का हार। मैहर से जुड़ी कई सारी लोकोक्ति हैं। इनमें एक है आल्हा और ऊदल से जुड़ी। आल्हा और ऊदल को शारदा देवी का अनन्य भक्त कहा जाता है। दोनों पर मां शारदा की असीम कृपा है। कहा जाता है कि जब सुबह मंदिर के पट खोले जाते हैं तो लाल फूल देवी के चरणों में अर्पित मिलते हैं। ये फूल आल्हा द्वारा अर्पित किए जाते हैं।
आल्हा और ऊदल पराक्रमी योद्धा थे। मंदिर के पास ही आल्हा और ऊदल का अखाड़ा है। इस अखाड़ा में एक तालाब है जिसमें लाल कमल के फूल होते हैं। तालाब के पास ही मंदिर है जिसमें खड़ाऊ रखी हुई। ऐसा कहा जाता है कि ये खड़ाऊ आल्हा की है। यहां तलवार भी रखी हुई है। मंदिर के पास ही नक्षत्र उद्यान है जहां 27 नक्षत्रों के अनुसार पौधारोपण किया गया है।
मैहर, मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित है। शारदा देवी मंदिर विन्ध्याचल पर्वत की पार्श्व श्रृंखला के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। समुद्र तल से लगभग 500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मंदिर आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ, प्रकृति के अनुपम दर्शन भी सुलभ कराता है।
मंदिर पहुंचने के लिए तीन मार्ग हैं। पहला सीढ़ी से - मंदिर तक पहुंचने के लिए कुल 1000 सीढ़ियां हैं। दूसरा सड़क से - सड़क मार्ग मंदिर से कुछ दूरी तक जाता है फिर सीढ़ियों से जाना होता है। तीसरा रोपवे से - रोपवे सबसे आसान और सुविधाजनक पहुंच मार्ग है।
मंदिर के पास ही ठहरने और खानपान की उचित व्यवस्था है। यहां सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट होटल हैं। खानपान के लिए भी रेस्टोरेंट हैं। यहां जगह-जगह भंडारा भी होता है। बाजार में जहां प्रसाद तो मिलता ही है इसके अलावा खिलौने, तरह-तरह के सजावटी सामान, क्रिस्टल, चूड़ी-बिंदी, कपड़ों की दुकान भी है।
मैहर की हवा में संगीत घुला हुआ है। इसे संगीत नगरी यानी 'सिटी ऑफ म्यूजिक' भी कहा जाता है। पद्मविभूषण अलाउद्दीन खां ने यहीं मैहर बैंड की स्थापना की थी। मैहर घराना कहा जाता है इस घराने से अनेक मशहूर हस्ती जुड़ी हुई हैं जिनमें अकबर खां, हरिप्रसाद चौरसिया, पन्ना लाल घोष, पंडित रविशंकर आदि लिस्ट बहुत लंबी। ये सभी अलाउद्दीन खां के शागिर्द थे। अलाउद्दीन संगीत समारोह का आयोजन प्रतिवर्ष मैहर में किया जाता है।
मैहर तक पहुंचना बहुत आसान है। हावड़ा-मुंबई रेलवे खंड पर स्थित होने के कारण देश के बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। कटनी रेलवे स्टेशन मैहर से नजदीकी सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन है। मैहर से नेशनल हाईवे 30 गुजरता है जो मैहर को उत्तर भारत और दक्षिण भारत से जुड़ा है। सतना से मैहर की दूरी 45 किमी और कटनी से मैहर 65 किमी है।
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