चांद बावड़ी : दुनिया की सबसे गहरी और पुरानी बावड़ी जहां बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है
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| चांद बावड़ी |
पहेली, भूमि, भूल-भुलैया, द फॉल और द डार्क नाइट राइजेस इन सारी फिल्मों में एक समानता है जो इन्हें राजस्थान की एक जगह से जोड़ती है। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड की ये फिल्में इस जगह की भव्यता, सुंदरता और विशालता को एक साथ लाकर फिल्मों को और ज्यादा रोचक बनाया गया। राजस्थान की ये जगह है दौसा जिले का "आभानेरी"। आभानेरी जिसे सूर्य की नगरी (The City Of The Sun) भी कहा जाता है।
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित आभानेरी है। इस जगह को लोग चांद बावड़ी (Chand Stepwell) की वजह से जानते हैं। चांद बावड़ी भारत की सबसे गहरी और पुरानी बावड़ी है। इसकी भव्यता और सुंदर देखते ही बनती है। पूरा बावड़ी परिसर (premises) वर्गाकार है। बावड़ी के चारों ओर बरामदे बने हुए हैं। शायद ये बरामदे आराम फरमाने के लिए बनवाया गया है। आजकल इन बरामदों में ढेर सारी मूर्तियां रखी गईं हैं। जिन्हें हर्षद माता मंदिर और बावड़ी के आसपास पाया गया है। यह बावड़ी भारतीय पुरातत्व विभाग (Archeological Site Of India) के अंतर्गत आती है।
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| भारत की सबसे गहरी बावड़ी |
इस बावड़ी को देखकर लगता है कि इसे इतिहास के कारीगरों ने बड़े-बड़े आहिस्ता-आहिस्ता तराशा। एक-एक बारीकियों को ध्यान में रखकर बावड़ी को मोती की माला की तरह चमकदार बनाया है। कहा जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण निकुंभ वंश के राजा चांद ने 8वीं-9वीं शताब्दी के बीच करवाया था। गुर्जर प्रतिहार वंश के शक्तिशाली राजाओं में से एक राजा मिहिरभोज को ही चांद के नाम जाना जाता है। हजारों साल पहले बनी ये बावड़ी आज भी इतिहास का प्रतिबिंब है।
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| बावड़ी समीप बना कलात्मक और विशाल संरचना |
बावड़ी का निर्माण (Construction) बारिश के पानी को इकट्ठा करने और पानी की कमी दूर करने के लिए किया जाता था। बावड़ी एक तरीके का कुंआ होता है बस फर्क इतना होता है कि इसमें पानी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। चांद बावड़ी आकार(size) में बहुत बड़ी है इसमें पानी तक पहुंचने के लिए 3500 सीढियां हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति बावड़ी में नीचे जाने के लिए जिन सीढियों का इस्तेमाल करता है लौटते समय पक्का है कि उन सीढ़ियों को भूल जाता है।
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वर्गाकार (Square shape) चांद बावड़ी के पूर्व, उत्तर और दक्षिण की ओर सीढ़ियां बनी हुईं हैं। वहीं पश्चिम की ओर झरोखे, नृत्यमंडप आदि है जिसमें राजपूत और इस्लामिक स्थापत्यकला (Indo-Islamic architecture) दिखाई देता है। इस बावड़ी की गहराई 100 फीट है। बावड़ी के पश्चिम ओर बने तीन मंजिला इमारत के बारे में कहा जाता है कि इसमें एक सुरंग है जो 17 किमी लंबी है और भांडरोज नामक शहर में खुलती है।
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| बावड़ी में स्थित 3500 से अधिक सीढ़ियां |
बावड़ी की बनावट और संरचना की बात करें तो बावड़ी दुनिया की सबसे बेहतरीन संरचना में से एक है। पत्थरों को कुरेदकर उकेरी गई कलाकृति अद्वितीय (Unique) है। यहां बावड़ी का प्रवेश द्वार (Entry Gate) पश्चिम दिशा की ओर है। बावड़ी के एक ओर तीन मंजिला इमारत है इसमें सबसे नीचे की ओर दो खंभे हैं। इन दो खंभों में से एक खंभे में महिषासुर मर्दिनि और दूसरे खंभे में गणेश भगवान की प्रतिमा विराजमान है।
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| चांद बावड़ी में स्थित कलात्मक मूर्ति |
इस बावड़ी के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं जिनमें से एक ये भी एक है कि ये भूतिया जगह है। कहा जाता है कि एक बारात इस बावड़ी में समा गई। राजस्थान की कई सारी जगह की तरह यहां रात में आना मना है।
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| चांद बावड़ी के पास स्थित हर्षद माता मंदिर |
पहले इस जगह का नाम आभा नगरी था लेकिन इसका नाम बदलते हुए आभानेरी हो गया। आभानेरी केवल चांद बावड़ी केवल के लिए फेमस नहीं है। बावड़ी से कुछ सौ मीटर की दूरी पर हरसिद्धि मंदिर है जिसे लोग हर्षद माता मंदिर भी कहते हैं। हरसिद्धि मंदिर जो आज दिखाई देता है उसे जयपुर के राजा सवाई जयसिंह ने बनवाया था। मंदिर की बनावट बेहद शानदार है। पत्थर पर बारीक कलाकृतियों को उकेरा गया है।
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| राजा सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित हर्षद माता मंदिर |
मूर्तियों से सजा यह मंदिर भारतीय स्थापत्यकला की पहचान कराता है। मंदिर के चारों फैले अवशेषों (Remains) से पता चलता है कि एक समय ये मंदिर बहुत विशाल रहा होगा। मूर्तियों से लेकर खंभों और अन्य कलाकृतियों के अवशेष पड़े हुए हैं। आज के समय जो मंदिर दिखाई देता है चबूतरे पर बना हुआ है। ये मंदिर में दोहरा चबूतरे वाला है।
आभानेरी फेस्टिवल (Abhaneri Festival)
हर साल आभानेरी के नाम से आभानेरी फेस्टिवल (Abhaneri Festival) का आयोजन किया जाता है। इस फेस्टिवल में राजस्थान की लोक संस्कृति (Folk Culture) से लोगों की पहचान कराई जाती है। इस फेस्टिवल में कालबेलिया, घूमर, भामई जैसे शानदार लोक नृत्यों (Folk Dance) से इस फेस्टिवल में चार चांद लग जाते हैं। इस फेस्टिवल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं। इसके अलावा फेस्टिवल में राजस्थान के देसी व्यंजनों (Cuisine) को चखने का मौका मिलता है।
भाषा और स्थान (Language & Location)
राजस्थान के दौसा जिले में आभानेरी स्थित है। राजधानी जयपुर से 90 किमी दूर स्थित है। यहां पर स्थानीय लोग ढूंढाड़ी बोली (Dialect) बोलती हैं। ढूंढाड़ी के अलावा हिंदी भी लोग बोलते हैं।
नजदीकी आकर्षण स्थल (Nearest Tourist Attraction Points)
आभानेरी के आसपास बहुत से टूरिस्ट प्वॉइंट हैं जिनमें मेहंदीपुर बालाजी, दौसा, अलवर, सरिस्का नेशनल पार्क, जयपुर, भानगढ़, भरतपुर और डीग जैसी जगह हैं।
कैसे पहुंचे (How to reach)
एयरपोर्ट :- आभानेरी से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर है जो 90 किमी दूर स्थित है। यहां से भारत के बड़े शहरों के अलावा विदेश के कई शहरों के लिए फ्लाइट उपलब्ध (Available) है।
रेलवे स्टेशन :- आभानेरी से नजदीकी रेलवे स्टेशन बांदीकुई है जो मात्र 7 किमी दूर स्थित है। बांदीकुई रेलवे स्टेशन जयपुर-दिल्ली रेलमार्ग पर स्थित है। यहां से देश के बड़े शहरों के लिए आसानी से ट्रेन उपलब्ध(Available) है।
बस स्टैंड :- आभानेरी से नजदीकी बड़ा बस स्टैंड सिकंदरा है। यहां से आसानी से दिल्ली और जयपुर के लिए बस उपलब्ध(Available) हैं।
📃BY_vinaykushwaha







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