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आर्ट इचौल : आर्ट और आर्ट लवर्स के लिए जन्नत

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चांद बावड़ी : दुनिया की सबसे गहरी और पुरानी बावड़ी जहां बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है खपरैल कोठी, आर्ट इचौल जब भी गांव के बारे में ख्याल आता है तो मन में एक तस्वीर उभरकर आती है कि कच्ची सड़क होगी, सड़क पर आवारा जानवर होंगे और अधनंगे बच्चे सड़क पर जानवरों के पीछे दौड़ लगा रहे होंगे। सड़क किनारे घरों के बाहर बने चबूतरों पर लोग गप्पे लगा रहे होंगे या किसी पेड़ के नीचे लोगों की चौपाल लगी होगी। छानी वाले  कच्चे घर होंगे जिस पर पक्षी चहचहा रहे होंगे और सामान्य आदमी की लंबाई से कम ऊंचे दरवाजे से निकलता व्यक्ति अपने खेत की ओर जा रहा होगा। खेत की लहलहाती फसल में किसान या तो पानी दे रहा होगा या खाद या खेत में घुस आए आवारा जानवर को डंडे से भगाने के जतन कर रहा होगा।  ब्रिक टेंपल, आर्ट इचौल गांव की शांत और शांति को तोड़ने वाला कोलाहल दोनों मौजूद होता है। बस ये शहर के कोलाहल से थोड़ा अलग होता है । इन सब के बीच  मैं कहूं कि भारत के गांव की इस विशेषता के बावजूद एक गांव ऐसा है जहां कला बसती है। कला भी इस तरह जहां वेस्ट मटेरियल से लेकर पत्थर स...

चांद बावड़ी : दुनिया की सबसे गहरी और पुरानी बावड़ी जहां बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है

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चांद बावड़ी  पहेली, भूमि, भूल-भुलैया, द फॉल और द डार्क नाइट राइजेस इन सारी फिल्मों में एक समानता है जो इन्हें राजस्थान की एक जगह से जोड़ती है। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड की ये फिल्में इस जगह की भव्यता, सुंदरता और विशालता को एक साथ लाकर फिल्मों को और ज्यादा रोचक बनाया गया। राजस्थान की ये जगह है दौसा जिले का "आभानेरी"। आभानेरी जिसे सूर्य की नगरी (The City Of The Sun) भी कहा जाता है। राजस्थान के दौसा जिले में स्थित आभानेरी है। इस जगह को लोग चांद बावड़ी (Chand Stepwell) की वजह से जानते हैं। चांद बावड़ी भारत की सबसे गहरी और पुरानी बावड़ी है। इसकी भव्यता और सुंदर देखते ही बनती है। पूरा बावड़ी परिसर (premises) वर्गाकार है। बावड़ी के चारों ओर बरामदे बने हुए हैं। शायद ये बरामदे आराम फरमाने के लिए बनवाया गया है। आजकल इन बरामदों में ढेर सारी मूर्तियां रखी गईं हैं। जिन्हें हर्षद माता मंदिर और बावड़ी के आसपास पाया गया है। यह बावड़ी भारतीय पुरातत्व विभाग (Archeological Site Of India) के अंतर्गत आती है। भारत की सबसे गहरी बावड़ी  इस बावड़ी को देखकर लगता है कि इसे इतिहा...

पढ़ावली : चंबल का अनमोल और छुपा हुआ खजाना

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बटेश्वर मंदिर समूह : भारत का ऐसा मंदिर समूह जिसके पुनर्निर्माण में डाकू ने दिया योगदान   पढ़ावली मंदिर चंबल और बीहड़ का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले जो तस्वीर सामने आती है वो डकैतों की है। एक समय था जब चंबल नदी के आसपास के क्षेत्र और बीहड़ में डाकुओं का बोलबाला था। लोग डाकुओं के आतंक से परेशान थे लेकिन आज ये इलाका सांस ले रहा है। खुली हवा का आनंद ले रहा है। जैसे पहले लिया करता था। चंबल नदी के आसपास के इलाके में 6वीं से 13वीं शताब्दी (Century) के कई ऐतिहासिक स्थल (Historical Site) देखने को मिलते हैं। इन्हीं ऐतिहासिक स्थल में एक है पढ़ावली(Padhavali)। पढ़ावली गढ़ी का सिंह द्वार पढ़ावली, मुरैना से  29 किमी और  ग्वालियर  से 35 किमी दूर स्थित है। पढ़ावली अपने मंदिर और गढ़ी के लिए जाना जाता है।   पढ़ावली गांव में एक गढ़ी (Fortress) है जिसे गढ़ी पढ़ावली कहते हैं। यहां एक गढ़ी के अंदर एक मंदिर है जो आकर्षण का केंद्र है। गढ़ी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गईं हैं। सीढ़ियों की शुरुआत मेें ही दोनों तरफ शेर और शेरनी की मूर्ति लगी हुई जो म...

बटेश्वर मंदिर समूह : भारत का ऐसा मंदिर समूह जिसके पुनर्निर्माण में डाकू ने दिया योगदान

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  बटेश्वर मंदिर समूह : भारत का ऐसा मंदिर समूह जिसके पुनर्निर्माण में डाकू ने दिया योगदान     बटेश्वर मंदिर समूह, मुरैना  भारत का प्यारा-सा राज्य मध्यप्रदेश अपने मंदिरों, घने जंगलों, नदियों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। खजुराहो के भव्य और कलात्मक मंदिर हों या बटेश्वर के अद्भुत छटा बिखेरते मंदिर। एमपी के ग्वालियर से करीब 30 किमी दूर स्थित हैं बटेश्वर के मंदिर समूह। शानदार कलाकृति के प्रतीक ये मंदिर एक-दो नहीं बल्कि कई सारे मंदिर हैं। मंदिरों की संख्या तो 200 से ज्यादा बताई जाती है। बटेश्वर में मंदिरों का विहंगम दृश्य बटेश्वर मंदिर समूह चंबल क्षेत्र में स्थित कला का अद्भुत नमूना हैं। बलुआ पत्थर से बने इन मंदिरों का निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजाओं ने करवाया था। इन मंदिरों का निर्माण 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ था। विशाल क्षेत्र में स्थित ये मंदिर भगवान विष्णु, शिव और देवी को समर्पित हैं। यहां मंदिर में आकार और आकृति में विभिन्नता साफ-साफ देखी जा सकती है। छोटे-छोटे मंदिरों में आज भी कला जीवित है। किसी मंदिर में शिखर है, तो किसी मंदिर की ...